अजी मत पूछो
त्योहारों पे मची है सेल, अजी मत पूछो
बाजार में है रेलम पेल,अजी मत पूछो
ये डिस्काउंट और उपहारों के चक्कर में
कहा कहा मैं हुआ सेल, अजी मत पूछो
पडोसी मेरा रोज खरीददारी करे
देख उसको मेरी बीबी जल भून मरे
लूट मची है बाज़ारो में, पडोसी लूट ले गया
मैं निकम्मा, नकारा, घर में पड़ा ही रह गया
एक पर एक फ्री है, इसी लूट के चक्कर में
कितना लूटा गया मैं, अजी मत पूछो
लोग रोज रोज दौड़े पुरे बाजार में
खरीदना कुछ बाकि ना रहे, इसी हाहाकार में
पैसे खर्च करके आये और ये बताए
लूट के बाजार में, कितने पैसे कमाए
इसी तरह पैसे बनाने के चक्कर में
कितना मैं हुआ कंगाल, अजी मत पूछो
पडोसी सुबह से अपनी बीबी को बाजार में घुमा रहा है
बाजार में जो लूट मची है उसको तो वही भुना रहा है
कल वो लोग दस हज़ार के सामान खरीद कर लाये थे
५०% की छूट पर पुरे दस हज़ार रुपये बचाये थे
इसी छूट पर पैसे बचाने के चक्कर में
कितना हुआ मैं बेहाल, अजी मत पूछो
मैं ठहरा निकम्मा, निठल्ला, नालायक, नाकारा
घुमु मैं इधर उधर, जहा तहां, बन के आवारा
इसी बात पर होती है घर में मेरी रोज लड़ाई
बात बात पर घरवाले करे पडोसी की बड़ाई
बाजार में घूम कर नाम कमाने के चक्कर में
कहा कहा से हुआ मैं लाल,अजी मत पूछो
..... डा. रणजीत सिंह 'अविकल'
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