Monday, February 20, 2017

पहचान अभी बाकि है-१२ 


संघर्षपूर्ण अतीत, पर उचाईयां भी महान थी 
लड़े, जीते, वो लड़ाइयां भी कहाँ आसान थी 
हौसलो की उड़ान थी, उड़ान में भी जान थी 
बादलों के ऊपर उड़ना ही मेरी पहचान थी 
नभ में  मेरी झांकी, मुस्कान अब भी बाकि है 
आज भी जिन्दा हूँ, मेरी जान अब भी बाकि है 
 मत समझो मुझे अतीत का साया, मेरा वर्त्तमान अभी बाकि है 
मेरी पहचान अभी बाकि है

चर्चे खूब चलते थे, शहर भर में हमारे
प्रसंशा मेरी रहती थी, अधरों पे तुम्हारे
चाहते थे तुम भी चलना मेरी ही राह पर
पर चल ना पूरा पाए ह्रदय से चाह कर
चल नहीं पाए तो हो गयी राह ही ख़राब
हर बात पर बताओ, तुम ठीक मैं ख़राब
अपमान और करना नहीं, मुझमे आन अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है

बाजुओं में जोर था, नाम चारो ओर था 
लड़ाइयां थी सामने, ना ही कोई चोर था 
लड़ना क्या छोड़ा, तुमने हारा मान लिया
 सरलता से तुमने मुझे, बेचारा जान लिया
विश्राम बस है, लड़ाइयों से थका नहीं हूँ,
आते है सारे दाँव-पेच, कही छका नहीं हूँ 
हड्डियों में अब भी जोर, मुझमे पहलवान अभी बाकि है 
मेरी पहचान अभी बाकि है

भंवरजाल में उलझकर जटिल हुआ मैं 
समय के कुठाराघात से चोटिल हुआ मैं 
अपने को जानों नहीं, हाल मेरा पूछते हो 
अपना कोई समाधान बिन मांगे ठूंसते हो 
भांन मुझे भंवरजाल से भागने का सलीका  
भांति भांति के भामाशाहो से बेहतर तरीका 
भरोशा है निकलने का इस जाल से, मेरे ह्रदय का समाधान अभी बाकि है 
मेरी पहचान अभी बाकि है






  












   






Tuesday, February 14, 2017


पहचान अभी बाकि है-११ 

नैतिकता के नाम पे हमेशा होता मेरा इस्तेमाल 
जो माने इसे तंगहाल, जो न माने वो मालामाल
दुकान के बाहर लगा बड़ा पोस्टर ये नैतिकता
काम पूरा हो गया तो गयी तेल लेने ये नैतिकता
सब कुछ जानकार भी इससे अंजान बने बैठा हूँ
माना इस्तेमान किया, इसका संज्ञान लिए बैठा हूँ
नैतिकता अब भी कही बची है, मर्यादाओ का सिवान अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है


माना की तुम सही पर मैं भी कहा ख़राब हूँ
व्यक्ति तुम अच्छे, इंसान मैं भी लाजबाब हूँ
शिष्टाचार तुममे तो  मुझमे अब भी है अदाब
सफल आज तुम तो मेरा भी बाकि है शबाब
गलतियां मेरी कुछ, जिनका मूल्य चुकाना है
मेरे अंदर भी राम, अपने कृष्ण को जगाना है
रावण मत समझो मुझे, मुझमे भगवान् अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है

 
 
  

Saturday, February 4, 2017

पहचान अभी बाकि है-१० 



चांदी जैसे गाल और सोने जैसे बाल  
भिखमंगो की बस्ती में बस तुम मालामाल
तुझे देखूं तो एक मदहोशी छायी रहती है 
दूर जो होती हो तो नब्ज घबरायी रहती है 
हुस्नपरी तुम बेमिशाल, मैं भी जिगर रखता हूँ
साथ तेरा पाने को  मैं हद से गुज़र सकता हूँ
लकीर का फ़क़ीर मत समझो, मेरे अंदर सुल्तान अभी बाकि है 

मेरी पहचान अभी बाकि है



आओ अब फिर से आरम्भ करे
शुभ का फिर से शुभारम्भ करे
सुनहरा पथ जो पीछे छूट गया
कर्त्तव्य पथ पर कुछ टूट गया
अतीत के ग़मों को क्यों याद करे
उन यादों में क्यों वक्त बर्बाद करे
पीछे मुड़कर देखना नहीं, मैदान बहुत बाकि है 
मेरी पहचान अभी बाकि है

छा चूका है घना अँधियारा
शोला जो चिनगारी से हारा 
घनघोर निराशा छाने लगी 
अभिलाषा मृत हो जाने लगी 
उम्मीद फिर भी मेरे साथ है 
लगता मेरी डोर मेरे हाथ है 
रणछोड़ मत समझो मुझे, मुझमे पार्थ का ज्ञान अभी बाकि  है 
मेरी पहचान अभी बाकि है