जिंदगी न छोड़ दे
निकला न करो रमजान में घर से तुम,
निकला न करो रमजान में घर से तुम,
कही लोग चाँद समझ रोजा ना छोड़ दें
दुवा में मांगे तेरा जिन्द्गगी भर का साथ,
ना मिले साथ तो कही जीना न छोड़ दें
मधुशाला की तरफ गुजरा ना करो तुम
तुमको देख कही लोग पीना ना छोड़ दें
रात का घना अँधियारा कुछ यूँ डराता है
ऐसा लगता है चाँद चांदनी को न छोड़ दे
कट रही थी जिंदगी बड़े मजे में अकेले
अब डराए जमाना कि तू साथ ना छोड़ दे
डॉ. रणजीत सिंह 'अविकल'
ना मिले साथ तो कही जीना न छोड़ दें
मधुशाला की तरफ गुजरा ना करो तुम
तुमको देख कही लोग पीना ना छोड़ दें
रात का घना अँधियारा कुछ यूँ डराता है
ऐसा लगता है चाँद चांदनी को न छोड़ दे
कट रही थी जिंदगी बड़े मजे में अकेले
अब डराए जमाना कि तू साथ ना छोड़ दे
जिसे भी हमने चाहा वो रुलाता चला हमें
मेरे खुदा ऐसे लोगो से मिलाना तो छोड़ दे
तुम नहीं जानते कि कितना प्यार है तुमसे
तेरे एक इशारे पर जान तेरे पास छोड़ दें
सब समझ के भी तुम हमें समझ न पाए
समझ जाओ तो हम अब समझना छोड़ दें
नमीं ला देती है आँखों में याद तेरी
उन यादो को कैसे संजोना छोड़ दें
सुना है एक रिश्ते में नहीं होती पूरी जिंदगी
पर तेरे ना होने से ये जिंदगी हमें न छोड़ दे
डॉ. रणजीत सिंह 'अविकल'
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