क्यों तुम्हे ऐतराज है?
क्यों तुम्हे ऐतराज है?
मेरी नजदीकी से
भूल गये जब भरी महफ़िल में, मेरा साथ पकड़ा था
हालात की तन्हाइयो में मेरा हाथ जकड़ा था
क्यों तुम्हे ऐतराज है?
मेरी बातो से
भूल गये जब मेरी एक एक बात पे ठहाके लगाया करते थे
आज आने में देर की यह शिकायत भी दर्ज कराया करते थे
आज आने में देर की यह शिकायत भी दर्ज कराया करते थे
क्यों तुम्हे ऐतराज है?
मेरे अपनेपन से
क्या तुम्हे याद नहीं जब घंटो दिल की गहराइयो में झाँका करते थे
घंटे, दिन, सप्ताह कैसे बित जाते थे पर कभी नहीं आँका करते थे
वो रातो का जगाना,
अपने दोस्त को सताना
तुम्हारा रूठना
मेरा मनाना
सब कुछ बहुत याद आते है
यादो में बहुत सताते है
पर सोचता हु, वो सारे पल क्या सिर्फ तुम्हारे थे
वो हसीन, प्यारे लम्हे तुमने जो मेरे साथ गुजारे थे
शायद तुम भी उन यादो के सहारे ही रहते होगे
याद मुझे कर कर के गमो को पी के रहते होगे
लेकिन इतना मुझे बिस्वास है,
इस बात का आभास है
आओगे तुम एकदिन जरूर
तुम्हारे बिना ये जीवन निस्वास है
डॉ. रणजीत सिंह 'अविकल'
डॉ. रणजीत सिंह 'अविकल'
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