फिर तु क्यों उदास है?
ना किसी से कम हो तुम
ना किसी का भ्रम हो तुम
जो खुद तु अपने पास है
तो फिर तु क्यों उदास है?
रास्ते न दिख रहे, कोहरा घना सा है
आस लगी टूटने, मन अनमना सा है
उम्मीद ये जो तेरे पास है
तो फिर तु क्यों उदास है?
राह में है रोड़े बहुत, राह कहा आसान है
पैर में है छाले बहुत, कराहता आसमान है
पर जीवन जो तेरे पास है
तो फिर तु क्यों उदास है?
परिस्थितियां विपरीत जो तुझे ना सोने देती है
बाधाये जो भविष्य को न अपना होने देती है
ये वर्त्तमान जो तेरे पास है
तो फिर तु क्यों उदास है?
अँधेरा बहुत है, समय भी ना तेरे साथ है
कुछ नहीं दिख रहा, छुपता आफ़ताब है
तेरा भुजबल जो तेरे साथ है
तो फिर तु क्यों उदास है?
डॉ. रणजीत सिंह 'अविकल'
डॉ. रणजीत सिंह 'अविकल'
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