Monday, November 7, 2016

दिन में तारे नज़र आने लगे

जो कहते थे किस्मत मुट्ठियों में बंद है, 
आज वो भी मंदिरों के चक्कर लगाने लगे 
उनकी नींद उड़ गयी, उनका चैन खो गया  
उन्हें भी दिन में तारे नज़र आने लगे 

ये वही लोग है, ये वही शक्श हैं 
जो कहते थे प्यार व्यार कुछ होता नहीं 
ये महज बाते बड़ी है काम कुछ भी नहीं 
आज वो भी इश्क़ के मारे नज़र आने लगे 
उन्हें भी दिन में तारे नज़र आने लगे

मुझे अब भी याद है, उर में दफन राज है 
राज करते थे वो, कहते थे अपना ही राज है 
अपने लिए अलग सड़के बनाते थे वो 
आज वो भी सड़क पर नज़र आने लगे 
उन्हें भी दिन में तारे नज़र आने लगे

हमेशा से उसने ज़मीर से बेवफाई की 
किसी की भी ना हौसला अफजाई की 
 आज मेरी बाते बताते, चर्चे सब की सुनाते   
अब वो भी मेरे रंग में रंगे नज़र आने लगे 
उन्हें भी दिन में तारे नज़र आने लगे

  जो कहते थे की दुनिया है बस मेरी मुट्ठी   
अपने दम पर कर दे किसी की भी छुट्टी 
समय की चाल देखो, कि वो भी बेहाल है
वो भी भरी भरी आँखों में नज़र आने लगे 
उन्हें भी दिन में तारे नज़र आने लगे
,
 वो अर्जुन, वो सिकंदर वो था अकबर महान 
 जीतता रहा अपने भुजबल से सारा ये जहांन 
समय का चक्र देखो, क्या से क्या हो गया 
अपने दर पे वो भी छटपटाते नज़र आने लगे
उन्हें भी दिन में तारे नज़र आने लगे


                                                             डा. रणजीत सिंह 'अविकल'

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