हो के मज़बूर मुझे, उसने भुलाया होगा
हवा ने जुल्फ जब गालो से हटाया होगा
मेरी उँगलियों को महसूस कराया होगा
पीछे मुड़कर नज़रों ने मुझे ढूंढा होगा
हो के मज़बूर मुझे उसने भुलाया होगा
डाकिये को देख, मुझे याद में लाया होगा
रो रो ही सही, मेरे ख़तों को जलाया होगा
कलेजे से एक चीख निकल आयी होगी
हो के मज़बूर मुझे उसने भुलाया होगा
मेरी तस्वीर को जब सामने पाया होगा
बहती आँखों से उसे दूर हटाया होगा
कोशिशें भुलाने की ज़माने में हुई होंगी
हो के मज़बूर मुझे उसने भुलाया होगा