Monday, May 13, 2019


हो के मज़बूर मुझे, उसने भुलाया होगा 


हवा ने जुल्फ जब गालो से हटाया होगा 
मेरी उँगलियों को महसूस कराया होगा 
पीछे मुड़कर नज़रों ने मुझे ढूंढा होगा 
हो के मज़बूर मुझे उसने भुलाया होगा 

डाकिये को देख, मुझे याद में लाया होगा 
रो रो ही सही, मेरे ख़तों को जलाया होगा 
कलेजे से एक चीख  निकल आयी होगी
हो के मज़बूर मुझे उसने भुलाया होगा  

मेरी तस्वीर को जब सामने पाया होगा 
बहती आँखों से उसे दूर हटाया होगा 
कोशिशें भुलाने की ज़माने में हुई होंगी 
हो के मज़बूर मुझे उसने भुलाया होगा  



Thursday, April 18, 2019

ऐसा सोचा न था 

साथ मेरे तुम थे नहीं
साथ-साथ चले नहीं
साथ का वादा न था
रहने  का इरादा न था 
पर साथ छोड़ दोगे 
ऐसा सोचा न था 

दूर तो हमेशा से थे 
पास कुछ पल रहे 
पास आने का वादा न था 
पास रहने का इरादा न था 
पर इतने दूर चले जाओगे 
ऐसा सोचा न था

तेरी डोर मेरे हाथ न थी
जिंदगी कभी साथ न थी
पकड़ाने का कोई वादा न था
पकड़ोगे ऐसा इरादा न था
पर मेरी डोर छोड़ दोगे
ऐसा सोचा न था

परेशान कभी किया नहीं
हैरान कभी हुए नहीं
परेशान करोगे कोई वादा न था
हैरान होने का कोई इरादा न था
पर परेशान करना छोड़ दोगे
ऐसा सोचा न था


Saturday, February 2, 2019



शाम अभी हुई हुई नहीं कि दिन ये कैसे ढल गया
ह्रदय से अभी लगे नहीं कि दिल ये कैसे भर गया
साथ साथ चले थे तुम और  साथ का वादा भी था
आधी राह में ही क्यों,  रास्ता तेरा बदल गया

ह्रदय से दूर गए नहीं तो मशहूर कैसे हो गए
पलको पर जो बैठे हो तो दूर कैसे हो गए
पास ही रहे थे तुम पास ही का इरादा भी था
नजदीकियां ह्रदय से थी तो दूर कैसे हो गए