Wednesday, November 30, 2016

पहचान अभी बाकि है -५ 

कोई भी बात, रहता मैं ही गलत
बताते हमेशा, मुझे झूठ की लत
थोड़ा कहके आज थोड़ा रह गया
तेरी बातों के बीच रोड़ा रह गया
मुझको मज़ाक, उड़ाना जानों तुम
पूछने पर कह दो, बुरा न मानो तुम
मत उड़ाओ मेरी बातें, मुझमे सम्मान अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है

जिसे भी हमने चाहा, रुलाते चले हमें
कुछ हैं जो सपनों में, झुलाते चले हमें 
हमें खूब है अपनी हैसियत का अंदाज़ा 
 आँखों से तुम्हारी खैरात का भी अंदाज़ा
 छोटी है औकात, मगर बेदर्द नहीं हूँ
 जर्रो में रहता हु मगर खुदगर्ज़  नहीं हूँ
 मत मापो मुझे, मुझमे आसमान अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है

वक्त मुड़ चला, सभी रूठने लगे 
वक्त की मार से, रिश्ते टूटने लगे 
मेरी हिम्मत हो कैसे तुम तोड़ोगे?
मुझसे तुम कब तक मुह मोड़ोगे?
रूठा वक्त फिर से मना लाऊंगा
जो कभी न हुआ वो बना लाऊंगा
मत रूठो मुझसे, मुझमे उत्थान अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है

                                                                   डॉ. रणजीत सिंह 'अविकल'








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