पहचान अभी बाकी हैं-२
क्या हुआ जो तेरे साथ उड़ने लगा था
तेरे कहे पे आसमानों से जुड़ने लगा था,
तुमसे छोटे ही सही पंख मेरे पास भी थे,
देखकर तुझे उड़ानों के एहसास भी थे,
ज्यादा जो उड़ लिया तो पंख काटने लगे
बारीकियां उड़ान में तुम छांटने लगे
मत छांटो मेरे पंख, मुझमे उड़ान अभी बाकी है !
मेरी पहचान अभी बाकी हैं
भूल गए वो झांझावात जिसको हमने झेला था
जीवन के खेल जिनको साथ हमने खेला था
साँसे जो कम हुई कि तुमने अधमरा समझ लिया
इतिहास भुलाकर अब तो यह मरा समझ लिया
मुरझाये चेहरे से मेरी मौत की आहट सुनने लगे
मेरे जीतेजी जलाने के लिए लकड़िया चुनने लगे
मेरे जीतेजी जलाने के लिए लकड़िया चुनने लगे
मत जलाओ मुझे, मुझमे जॉन अभी बाकी है
मेरी पहचान अभी बाकी हैं
तुमसे ही सीखा था जूझना और जीने का तरीका
साथ हमने सीखा था अनजान रास्तो का सलीका
तेरे कहने पर ही तो पर्वत पर चढता चला गया
पर्वत के अनजान रास्तो पर बढ़ाता चला गया
अब जो शिकायत है कि मैं क्यों चढ़ा जा रहा हु
प्रयास तुम्हारा धकेल दो जो बड़ा जा रहा हु
मत धकेलो मुझे मुझमे ढलान अभी बाकी है
मेरी पहचान अभी बाकी हैं
एक ही बगिया के तो फूल थे मैं और तुम
एक ही बगिया के तो फूल थे मैं और तुम
एक ही बात पर लहलहाते थे मैं और तुम
तुमसे ही तो सीखा है मुस्कुराने का राज
जो भी हु जैसा भी हु, तेरी वजह से हूं आज
क्यों मेरी मुस्कराहट को भगाना चाहो तुम
ये है मेरी पहचान जिसे दबाना चाहो तुम
मत दबाओ मुझे, मुझमे मुस्कान अभी बाकी हैं
मेरी पहचान अभी बाकी हैं
जीवन की आँख मिचोली को साथ साथ हम खेले
यौवन की अंगड़ाई ली, घूमे हम जीवन भर के मेले
मेले की चकाचौध में कुछ तुम भूले कुछ मैं भुला
तुम भूले तो कोई बात नहीं पर मैं भुला तो क्यों भुला
बेवफाई के हर इल्जाम का इन्तहान हो गया हु मैं
जा रहे हो छोड़ कर क्यों कि बेईमान हो गया हु मै
मत जाओ मुझे छोड़ कर, मेरा ईमान अभी बाकी है
जीवन की आँख मिचोली को साथ साथ हम खेले
यौवन की अंगड़ाई ली, घूमे हम जीवन भर के मेले
मेले की चकाचौध में कुछ तुम भूले कुछ मैं भुला
तुम भूले तो कोई बात नहीं पर मैं भुला तो क्यों भुला
बेवफाई के हर इल्जाम का इन्तहान हो गया हु मैं
जा रहे हो छोड़ कर क्यों कि बेईमान हो गया हु मै
मत जाओ मुझे छोड़ कर, मेरा ईमान अभी बाकी है
मेरी पहचान अभी बाकी हैं
डा. रणजीत सिंह 'अविकल'
डा. रणजीत सिंह 'अविकल'
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