Sunday, March 26, 2017


पहचान अभी बाकि है - १५ 


रास्ते न दिख रहे, कोहरा घना सा है
आस लगी टूटने, मन अनमना सा है 
घनघोर बादलों बीच झांकती अजोर है 
हर पल बताये होनेवाली जल्दी भोर है 
जीवन से भरपूर जिंदगी का साथ है
परायों संग कुछ अपनों का भी हाथ है 
शक्तिविहीन मत समझो, मुझमे शक्तिमान अभी बाकि है 
मेरी पहचान अभी बाकि है 


रास्ते न दिख रहे, फिर भी हमे चलना है 
बाधाएं पग पग पर फिर भी हमें बढ़ना है 
मरने के सौ बहानें फिर भी हमें जीना है 
जीवन के जहर को अमृत समझ पीना है 
परिस्थिति झुकाए फिर भी नहीं झुकना है
आगे बढ़ते रहना है कही नहीं रुकना है
अँधेरे में घिरा हूँ पर मेरा उदीयमान अभी बाकि है 
                                                               मेरी पहचान अभी बाकि है


ध्वंस के बीच करूँ इस धरा का पुनर्निर्माण
उत्थान पतन के बीच होगा चीर का निर्माण
इसी बीच दधीच की तरह हड्डिया गलायेंगे
अब तक जो नहीं हुआ, कर के दिखलायेंगे
प्यास लगी तो रेत निचोड़ जल निकालेंगे
धरा के धरातल पर धामिनी रंग खिलालेंगे
निःशक्ति हूँ पर मरा नहीं, मुझमे प्राण अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है 



  





Tuesday, March 14, 2017


मेरी पहचान अभी बाकि है-१४ 

ताक पे सारे नियम रखे, इन चोरो की टोली ने 
देखो कुछ छूटे न, भिखमंगों तक की झोली में 
ये सारे के सारे चोर देखो साहूकार बने बैठे हैं 
अजब चाल इनकी देखो, किस तरह से ऐंठे हैं 
चोरी खुद ये करे, और इल्जाम हम पर लगाए 
अपनी छिछोरी हरकतों के तीर हम पे चलाये 
मत लो मेरे सहन की परीक्षा, मेरा शस्त्र संधान अभी बाकि है 
मेरी पहचान अभी बाकि है


औरो से बस लिखवाया, कभी तो खुद से लिखा करो
दूसरों से बस सिखलाया, कुछ तो खुद से सीखा करो
जिसके लिए यहाँ आये हो, थोड़ा वो भी किया करो
भक्ति करके जीते आये, कभी तो खुद से जिया करो
मुझे तो तुम तौल रहे हो, खुद को भी तुम तौला करो
 स्वामी भक्ति छोड़छाड़ के, कभी तो मौला मौला करो
भक्ति की उम्मीद मुझसे रक्खो नहीं, मेरा आत्मसम्मान अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है








Sunday, March 5, 2017

मेरी पहचान अभी बाकि है -१३ 



गड़ा हूँ जमीन में, पड़ा पहचानहीन मैं 
कलरव है डाली पर, खुद शब्दहीन मैं 
धुप लगे तुझको, पर सर्द मेरी फ़ितरत 
सर्दी लगे तुझको, तो दर्द मेरी जिगरत 
न कोई बिषाद की तनाएँ क्यों उन्मुक्त  
जकड़ा खुद अँधेरे में पर तुम परिमुक्त 
लहलहा रहे हो तुम, क्योकि मेरा विषपान अभी बाकि है 
मेरी पहचान अभी बाकि है

शक्तिपुत्र हूँ मैं, सीने में लिए भक्ति
मृत्युंजय मैं, बाजुओ में बाकि शक्ति
अर्जुन मै, गांडीव मैं, पिनाक भी मैं
राम मै, परशुराम मै, सारंग भी मैं
नव जुग, नव आलोक का पथिक मैं
अनकही बातों का उत्तर हूँ सटीक मैं
वक्त मेरे कुछ दिन तो ठहर, मेरी मुरली की तान अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है

बादल हूँ आवारा, मैं दीवाना हूँ
अपनी ही मस्ती का मस्ताना हूँ
मालूम नहीं कहाँ से गुज़रना है
ये भी न जानू कहाँ पे बरसना है
भयावह लगूँ, पर जीवन से भरा
रूठजाउ तो सूखा, नहीं तो हरा
पागल मत समझो मुझे, मुझमे सृष्टि का वरदान अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है

                                                                     
                                                                                  डॉ. रणजीत सिंह 'अविकल'