तड़प
हर तड़प की यहाँ पर एक, अधूरी सी कहानी है
तड़प के साथ जीते है, बस हाथो में निशानी है
तुम्हारी और हमारी तड़प में बस शेष इतना है
तड़प का रिश्ता अब हमारा, होने लगा रूहानी है
तड़प के साथ पूरी रात तड़पते हुए ही गुजरी है
उसी की याद आँखों में एक पल भी न बिसरी है
कैसा हाल रातो का कर डाला इस बेहया तड़प ने
कि सबकी सो के गुजारी है, हमारी रो के गुजरी है
तड़पता हु तुम्हारे बिन, हालत कुछ हुई अजीब
तुम जो साथ मेरे हो, तो मेरा सब कुछ है हबीब
इस तड़प ने कैसा हाल तड़पाकर बना डाला
सब कुछ साथ मेरे है, पर तुम बिन हुआ गरीब
तड़प आँखों में दिखती है, तड़प की सच्चाई है
भगाने से भी ना जाये, गजब इसकी बेहयाई है
तड़प के साथ और बेसाथ में बस फर्क इतना है
तड़प ना थी तो तन्हा थे, तड़प जो है तो तन्हाई है
तड़प के साथ अपनी, अलग सी ही कहानी है
तड़पता हु तुम्हारे बिन, हालत कुछ हुई अजीब
तुम जो साथ मेरे हो, तो मेरा सब कुछ है हबीब
इस तड़प ने कैसा हाल तड़पाकर बना डाला
सब कुछ साथ मेरे है, पर तुम बिन हुआ गरीब
तड़प आँखों में दिखती है, तड़प की सच्चाई है
भगाने से भी ना जाये, गजब इसकी बेहयाई है
तड़प के साथ और बेसाथ में बस फर्क इतना है
तड़प ना थी तो तन्हा थे, तड़प जो है तो तन्हाई है
तड़प के साथ अपनी, अलग सी ही कहानी है
हमे बिस्वास है हमको, मिलेगा जो जहानी है
हमे मालूम है एक दिन तड़प से नाता टूटेगा,
आँखों में है गंगाजल, और उम्मीदों का पानी है
डॉ. रणजीत सिंह 'अविकल'
डॉ. रणजीत सिंह 'अविकल'
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