Monday, December 26, 2016

पहचान अभी बाकि है -७ 

आज तुम्हे लग रहा है, बढ़त है तुम्हारी 
बढ़ कर भी चुप रहना, ये आदत हमारी 
बढ़त पर मना लो जितना भी शोर गूल 
असलियत के आते ही जाओगे सब भूल 
रात का अँधियारा, सुबह होनी अभी बाकि
कुछ पल का रुझान ये, बात है पूरी बाकि 
मत आंको मुझे, मुझमे रुझान अभी बाकि है 
मेरी पहचान अभी बाकि है

नयी नयी बातो से रोज हो छुभाते
लुभवाने वादों से मुझको लुभाते
रोज रोज ढूंढो नया एक बहाना
पूछू तो कहते हो नया ये जमाना
कब तक इन बातों से बहलाओगे
बिना बात के हवाइयां बनाओगे
मत रिझाओ मुझे, मुझमे परवान अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है

आज की रात तन्हा है, बेचैन है
बिखरा है मेरा सुख, और चैन है
हर वस्तु की एक कीमत होती है
चुकाने की भी एक नियत होती है
तन्हाइ की कीमत कैसे लगाओगे?
 बलिदान को मेरे कैसे भुलाओगे?
मत लगाओ मेरी कीमत, मेरा बलिदान अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है


   





Wednesday, December 7, 2016


पहचान अभी बाकि है - ६ 

अभी हमने सीखा चढ़ाइयों का राज 
अभी लगे मापने, कितना चढ़े आज   
अभी क्या बताये हम सीने का राज 
वक़्त हमारा आएगा तो छेड़ेंगे साज  
पहुंचकर हम दिखाएंगे चाँद पर तुझे
आज को देखकर ना चिढ़ाओ मुझे  
मत चिढ़ाओ मुझे, मुझमे चढ़ान अभी बाकि है 
मेरी पहचान अभी बाकि है

बिखर मैं जाऊँ, आया वो पल नहीं
पटका मैं जाऊँ, वो 'अविकल' नहीं
 समय की बात, वो भी बदल जायेगा
   बदलते हुए, अपना भी समय लाएगा
नियति की बात, जो चढ़ा हूँ तेरे हत्थे
हाथ है बंधे, समझो मुझको निहत्थे
पर  तरकस में मेरे, तीर-कमान अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है

 वक्त की मार है, सख्त है, कठोर है
कभी उधर है, तो कभी इस ओर है
चाहो तुम समर्पण, मेरे अरमान की
झुककर मैं मांगू, भीख दया दान की
इसी सख्ती में गिरेबान ना पकड़ लेना
मुझको तुम निराभिमान ना समझ लेना
मत आंको मुझे, मुझमे अभिमान अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है

तुमने ही बताया था चुप रहने का तरीका
तुमसे ही सिखा खामोशियों का सलीका
मर्यादाओ के चलते सुनता रहा मैं सबकी
ज्ञात मुझे उत्तर, जबाब दे सकता कबकी
मैं निरुत्तर नहीं हूँ, बस तेरा मान रखता हूँ
पास मेरे है उत्तर, मुह में जबान रखता हूँ
निरुत्तर मत समझो मुझे, मुँह में जबान अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है


                                                              डॉ. रणजीत सिंह 'अविकल'