तुम कमाल लगती हो
इन मस्त नशीली आँखों में, प्राण प्रिये तुम कमाल लगती हो
गोरी गोरी बांहे, लाल लाल कुर्ती, टमाटर सी लाल लगती हो
चांदी जैसे गाल और सोने जैसे बाल, सर से पैरो तक निखार
हम भिखमंगो की बस्ती में सिर्फ तुम ही मालामाल लगती हो
तुम्हे देखने का सब एक मौका ढूंढे, गांव के सारे बच्चे बूढ़े
सारे के सारे बूढ़े हो गये, सिर्फ एक तुम जवान लगती हो
अंग अंग से मस्ती छलके, देख के सबकी नज़रे बहके
चलती फिरती तुम कहानी, गांव में तुम बवाल लगती हो
हिरनी जैसी आंखे है तेरी, नज़र न हटती तुझसे मेरी
गजगामिनी चाल है तेरी, प्रिये तुम बेमिसाल लगती हो
कहाँ सवाँरा रूप प्रिये तुम, कहाँ रही तुम इतने दिन
रह रह कर पूछे मन, प्रियतमा तुम सवाल लगती हो
Hahahaha...nice description of a beauty...
ReplyDeleteHahahaha...nice description of a beauty...
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