तुमको चाहते ही रहना, है आदत हमारी
तुमको चाहते ही रहना, आदत है हमारी
तुम्हारे प्यार को पूजना ही पूजा है हमारी
तुम भले ही प्यार करो या कुछ और करो
तुमको पुकारते ही रहना, है आदत हमारी
भले ही तुम रूठ जाओ, ना मेरे पास आओ
पास आने भी ना दो, आउ तो तुम भगाओ
तुम्हारे पास आते ही रहना, है आदत हमारी
तुम्हारे केसुओं के छाये में बिताये हुए पल
झील सी गहरी आँखों से छलकते हुए जल
उन यादो को याद करना, है आदत हमारी
हमे अब भी याद है, उर में छुपा वो राज है
जब कहती थी तुम्हारे दिल में मेरा ही राज है
उन राजों को संजोना, है अब आदत हमारी
जलकुम्भी सी फैली हुई तेरी यादें, यादों में तुम
डूबते निकलते उन यादों में, हो आते है हम गुम
उन यादो में डूबते रहना , है अब आदत हमारी
तुमको चाहते ही रहना, है आदत हमारी
डॉ. रणजीत सिंह 'अविकल'
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