Tuesday, July 11, 2017

मेरी पहचान अभी बाकि है - १ ८  


करता तुम्हारी कब से प्रतीक्षा 
कब से है तेरे दर्शन की इच्छा 
हर बार लगता अब आओगे 
बन के बदरिया छा जाओगे 
पर अब तक तुम आये नहीं 
तुम्हे यहाँ ढूँढू, तुम हो कहीं 
इच्छा न छोड़ू, प्रतीक्षा न छोड़ू, 
 धैर्यवान मुझमे अभी बाकी है 
मेरी पहचान अभी बाकी है


प्रियतम सभी के आने लगे
गीत प्रीत के गुनगुनाने लगे
प्राणप्रिय मेरे कब आओगे
ठंढी सी छाँव बन छाओगे
वचन तो दिया था आने को
मत लाओ किसी बहाने को
आना पड़ेगा तुझे मेरी गली,
तेरी यादों का मकान यहाँ बाकी है
मेरी पहचान अभी बाकी है


कब आने वाले हो, जरा बतलाओ
क्या लाने वाले हो, जरा बतलाओ
जब भी आना, मुस्कुराते हुए आना
गले से लगाना, कही फिर न जाना
उंगली पकड़ कर बाग़ में घुमाना
मुझको पढ़ाना, कहानी भी सुनाना
देर करना नहीं, मेरा इंतहान अभी बाकी है
मेरी पहचान अभी बाकी है
 






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