Friday, December 28, 2018

काश मुझे तुम्हारे बिन जीना आता 


दिन दिन भर बाते करना 
बात बात पर आहे भरना 
छोटी से छोटी बाते बताना 
रह रह कर मुझको सताना 
इन बातों को बोरे में डाल सीना आता !
काश मुझे तुम्हारे बिन जीना आता 


स्वयं से पहले तुम्हारी बाते 
साँसों से टकराती सारी राते 
मेरी पसंद और तुम्हारी बाते 
भूलकर दुनिया के रिश्ते नाते  
अकेले अकेले चाय तुम्हे पीना आता !
काश मुझे तुम्हारे बिन जीना आता 


जिंदगी की गाड़ी पे बैठकर 
हाथों में हाथ डाले ऐंठकर 
चुपचाप मुझे महसूस करना 
मेरे लिए मुझपर ही बिगड़ना 
याद तुझे हमारी बातों का नगीना आता! 
काश मुझे तुम्हारे बिन जीना आता


मुझसे टकराती गर्म साँसे
पसीने से लथपथ मेरी आँखे
तेरा मेरे पास आना, मनाना
तुझको मनाना, मनाकर बताना
याद है जो तुझे जाड़े में पसीना आता 
काश मुझे तुम्हारे बिन जीना आता


तेरे लिए दिनभर इंतज़ार करना
शाम को उसका इज़हार करना
रोज नयी-नयी सारी बाते बताना
बैठाकर सारे वो रहस्य समझना
याद इनमें दिन, सप्ताह और महीना आता 
काश मुझे तुम्हारे बिन जीना आता

काश तुझे भी मेरे बिन जीना आता



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