Sunday, December 30, 2018

मिलने पर बताऊंगा 

आज कल दिन भर ऐसे ही बैठा रहता हु 
बीते दिनों की यादो में खोया रहता हु
पूरा दिन पता नहीं कैसे बीत जाता है 
मुझको पीछे छोड़ समय जीत जाता है 
लोग कहने लगे है की मैं बेकार हो गया हूँ 
कल तक पूछते थे अब अस्वीकार हो गया हूँ 
बहुत सी बाते है जो तुमको मैं सुनाऊंगा 
ये सारी बाते, मिलने पर बताऊंगा 

और सुनों ना, 
जो नया वाला पर्चा लिखा था 
जिसका बड़ा चर्चा हुआ था 
वो शोधपत्र अब छप गया है
लेकिन उसके बाद शोध ठप हो गया है 
सोचता हूँ, उस काम को आगे बढ़ाऊं
उस क्षेत्र में कुछ बड़ा नाम कमाऊ
पर व्याकरण में उलझ रह जाता हूँ 
मात्रा में अब भी मैं सुलझ नहीं पाता हूँ 
व्याकरण की बाते तुमको मैं सुनाऊंगा 
उनको कैसे ठीक करना है, मिलने पर बताऊंगा 

और पता है!
जो पौधा तुमने लगाया था 
जिसको अपने आँचल से सहलाया था 
अब वो बड़ा हो गया है 
अपने दम पर अब खड़ा हो गया है 
वो अब मुझको देखते रहता है 
लगता है, मेरे साथ तुम्हे खोजता है 
मैं बताता हूँ, तुम मेरे ह्रदय में हो 
पर वो मनाता ही नहीं 
उस पेड़ की सारी बातें, तुमको मैं बताऊंगा 
कैसा दिखता है वो, मिलने पर बताऊंगा 






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