Monday, January 29, 2018


काश तुम यहाँ होते

रास्ता कठिन रहा होगा, पाँवों में कितने छाला है
पल-पल दम घुटा होगा, दिख रही हाथो में हाला है 

मंज़िल जो न दिखी होगी, तो धड़कने बढ़ी होगी 
मुश्किलें जो राहों में पग पग पे मिली खड़ी होंगी 

जरूरत तुझे रही होगी, नज़रों ने मुझे ढूंढा होगा 
दीया बुझ गया होगा, ह्रदय भी बहुत कुढ़ा होगा 

काश तुम यहाँ होते, विचार भी ये आया होगा 
खाश सारे लम्हे होते, विचार भी बनाया होगा 

नज़रों से बस ओझल था, था तो तेरे पास में  
तुझसे तो कही दूर नहीं, बसता तेरी सांस में 

देखो मुझे दिल के आईने में, मैं मिलूंगा वहीँ 
हर घडी रहूं ह्रदय से तेरे साथ, जहाँ तू मैं वहीँ   

                                                                 डॉ. रणजीत सिंह "अविकल" 



  


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