मेरी पहचान अभी बाकि है-१६
रोम-रोम में रचि तेरी यादों की रचनाये
तन्हाई भी न तन्हा, रहने दे, क्या बताये?
उन रातों का जागना, रूठना, मानना
तेरा लिपटना, बतियाना, घंटों बिताना
सख्ती दिखाना, बड़ी बड़ी बाते संजोना
पर अकेले में तेरे आँचल में छुपके रोना
यादें है मेरी और इन यादों का मकान अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है
एकांत में होता अनुभव एकाकीपन का
एकांत बताये मोल तेरे संग जीवन का
प्यार, तकरार, मनुहार सब कुछ तुझसे
ज्ञान, अज्ञान, विज्ञान और शान भी तुझसे
समय हवा की तरह गुज़रे जब तू साथ हो
कुछ नहीं चाहिए बस हाथों में तेरा हाथ हो
क्या-क्या सुनाऊँ, तेरे संग जीवन का गान बहुत बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है
चाँद की चांदनी जैसी तेरी चंचलता
महान मार्तण्डय की तरह सरलता
फिर भी गुमान नहीं अपने होने का
जरा भी शिकन नहीं कुछ खोने का
मालुम है कि तुम सूरज सा चमकोगे
ईश्वर की फुलवारी में फूल सा महकोगे
तुझसे मिलेगी हमें भी पहचान, सितारों में तेरा स्थान अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है
एकांत में होता अनुभव एकाकीपन का
एकांत बताये मोल तेरे संग जीवन का
प्यार, तकरार, मनुहार सब कुछ तुझसे
ज्ञान, अज्ञान, विज्ञान और शान भी तुझसे
समय हवा की तरह गुज़रे जब तू साथ हो
कुछ नहीं चाहिए बस हाथों में तेरा हाथ हो
क्या-क्या सुनाऊँ, तेरे संग जीवन का गान बहुत बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है
चाँद की चांदनी जैसी तेरी चंचलता
महान मार्तण्डय की तरह सरलता
फिर भी गुमान नहीं अपने होने का
जरा भी शिकन नहीं कुछ खोने का
मालुम है कि तुम सूरज सा चमकोगे
ईश्वर की फुलवारी में फूल सा महकोगे
तुझसे मिलेगी हमें भी पहचान, सितारों में तेरा स्थान अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है
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