Sunday, March 26, 2017


पहचान अभी बाकि है - १५ 


रास्ते न दिख रहे, कोहरा घना सा है
आस लगी टूटने, मन अनमना सा है 
घनघोर बादलों बीच झांकती अजोर है 
हर पल बताये होनेवाली जल्दी भोर है 
जीवन से भरपूर जिंदगी का साथ है
परायों संग कुछ अपनों का भी हाथ है 
शक्तिविहीन मत समझो, मुझमे शक्तिमान अभी बाकि है 
मेरी पहचान अभी बाकि है 


रास्ते न दिख रहे, फिर भी हमे चलना है 
बाधाएं पग पग पर फिर भी हमें बढ़ना है 
मरने के सौ बहानें फिर भी हमें जीना है 
जीवन के जहर को अमृत समझ पीना है 
परिस्थिति झुकाए फिर भी नहीं झुकना है
आगे बढ़ते रहना है कही नहीं रुकना है
अँधेरे में घिरा हूँ पर मेरा उदीयमान अभी बाकि है 
                                                               मेरी पहचान अभी बाकि है


ध्वंस के बीच करूँ इस धरा का पुनर्निर्माण
उत्थान पतन के बीच होगा चीर का निर्माण
इसी बीच दधीच की तरह हड्डिया गलायेंगे
अब तक जो नहीं हुआ, कर के दिखलायेंगे
प्यास लगी तो रेत निचोड़ जल निकालेंगे
धरा के धरातल पर धामिनी रंग खिलालेंगे
निःशक्ति हूँ पर मरा नहीं, मुझमे प्राण अभी बाकि है
मेरी पहचान अभी बाकि है 



  





No comments:

Post a Comment