तुम
मेरी गुमसुम सी जिन्दगगी में जान हो तुम
होने से जो अभिमान हो वो गुमान हो तुम
तुम हो तो सबकुछ है, वरना सब वीराना है
खुद को ढूंढ़ता हु तुझमे, मेरी पहचान हो तुम
बेरंग जीवन की सबसे बड़ी जीत हो तुम
कृतघ्न जग में सबसे बड़े मन मीत हो तुम
बड़ी ही दूभर होती है जीवन की दोपहरी
खामोशियों में जो सुनु, वो संगीत हो तुम
मेरे जीवन की सबसे बड़ी राह हो तुम
हर पल जिसे पाना चाहु वो चाह हो तुम
रहते मेरे अंदर हो पर दूर दिखाई देते हो
जाने क्यों लगता बिन गौने का व्याह हो तुम
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